रमण कौल on जून 10th, 2009

James Von Brunnऐसा लगता है कि अमरीका में डेमोक्रेटिक पार्टी की लिबरल (उदारवादी) विचारधारा की सरकार बनने के बाद दक्षिणपन्थी कुछ अधिक ही सक्रिय हो गए हैं। पिछले सप्ताह एक गर्भपात कराने वाले डॉक्टर का कत्ल होने के बाद आज एक और नस्लवादी घटना हुई। वाशिंगटन डीसी के हॉलोकास्ट म्यूज़ियम, जिस में यहूदियों पर हुए अत्याचारों को दर्शाया जाता है, पर एक 88 साल के बूढ़े नव-नाज़ी ने कथित रूप से हमला किया। नियो-नाज़ी लोग हिटलर के प्रशंसक होते हैं और उसी की तरह यहूदियों और अश्वेतों से घृणा करते हैं।

यह व्यक्ति जिस का नाम जेम्स वॉन ब्रन था, 25 साल पहले भी नस्लवाद के आरोपों पर 6 वर्ष की सज़ा काट चुका था और अपनी वेबसाइट (holywesternempire.org जो कि कुछ देर पहले हटा ली गई है) पर कहता था कि उस की सज़ा के लिए काले और यहूदी जज/वकील/जूरी ज़िम्मेदार थे। ब्रन कहता था कि यहूदियों पर कोई ज़ुल्म नहीं हुआ, और ऍन फ्रैंक की डायरी मनघडन्त थी। ब्रन की वेबसाइट के विषय में यह वीडियो देखिए।

ब्रन को म्यूज़ियम के सुरक्षा कर्मचारियों ने रोका, पर फिर भी एक सुरक्षा कर्मचारी जो कि अश्वेत था, उस की गोली का शिकार हुआ और बाद में मारा गया।

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रमण कौल on अप्रैल 16th, 2009

kaulcenter@twitter140 अक्षरों की संदेश पत्रिका, यानी ट्विट्टर पर आप कितने सक्रिय हैं, इस के तीन मुख्य मापदंड हैं – आप कितना लिख रहे हैं (अपडेट्स या लेख संख्या), आप कितने लोगों का लिखा पढ़ रहे हैं (फॉलोइंग या पठन संख्या) और आप को कितने लोग पढ़ रहे हैं (फॉलोवर्स या पाठक संख्या)। पहली दो संख्याएँ बढ़ाना तो आप के अपने हाथ में है, यानी आप बहुत लिखिए और बहुत लोगों को पढ़िए, पर वास्तव में सफलता की निशानी है पाठक संख्या, यानी आप को कितने लोग पढ़ रहे हैं। और यह संख्या बढ़ाना आसान नहीं है। Read the rest of this entry »

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रमण कौल on अप्रैल 10th, 2009

वरुण गांधी प्रकरण टीवी पर तो छाया ही हुआ है, देसी इंटरनेट पर भी हाल में इस प्रकरण पर जितना कहा जा रहा है, उस के और उदाहरण कम हैं। चुनाव का समय है भई, यह तो होगा ही। पर आश्चर्य की बात यह है कि वरुण गांधी की वीडियो की सच्चाई पर कोई उंगली नहीं उठा रहा, सिवाय स्वयं वरुण गांधी के।

इंटरनेट पर जो लोग इस विषय पर चिट्ठे लिख रहे हैं, वीडियो डाल रहे हैं, चहचहा (ट्विट्टर पर) रहे हैं, और टिप्पणियाँ कर रहे हैं, उन को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है — वे जो उन के “वक्तव्यों” के कारण वरुण से नफ़रत करते हैं, और वे जो उन का समर्थन करते हैं। यदि आप भाजपा समर्थक हैं तो आप पहले वर्ग में हैं, अन्यथा दूसरे वर्ग में। इंटरनेट पर पहले वर्ग का ही बोलबाला लगता है। Read the rest of this entry »

रमण कौल on अप्रैल 10th, 2009

जीमेल के आधिकारिक चिट्ठे पर हुई घोषणा के अनुसार अब आप जीमेल में चित्र डाल सकते हैं, वैसे ही जैसे आप किसी ब्लॉगर पोस्ट में डालते हैं। यानी बजाय चित्र को संलग्न करने के, अब आप उसे ईमेल के बीच में भी घुसा सकते हैं। यह फीचर जीमेल लैब्स का नवीनतम फीचर है, और आप को इसे जीमेल की सैटिंग्स में जा कर लैब्स टैब के अन्तर्गत सक्रिय करना पड़ेगा। पहले आप को यही करने के लिए एचटीएमएल मेल बनाना पड़ता, जो अब जीमेल ने आसान कर दिया है।

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रमण कौल on अप्रैल 2nd, 2009

गूगल ने जीमेल-लैब्स में एक और बढ़िया फीचर की घोषणा की है – अब जीमेल खोज में आप ऑटो-कंप्लीट को सक्रिय कर सकते हैं। यानी आप यदि अपने किसी मित्र का ईमेल खोजना चाहते हैं, तो जैसे ही आप उन के नाम का पहला अक्षर टाइप करेंगे, जीमेल आप को वे सभी नाम सुझाएगा जिन में वह अक्षर है। फिर अपने काम के नाम पर क्लिक कीजिए और खोजिए। अन्य कई नए जुड़े फीचरों की तरह ही इस फीचर को भी आप को पहले जीमेल लैब्स में जा कर सक्रिय करना होगा। अपने जीमेल में सैटिंग्स पर क्लिक कीजिए, फिर लैब्स वाला टैब चुनिए और अपने इच्छित फीचर को सक्रिय कीजिए। अभी तो इस में केवल ईमेल पतों के आधार पर ऑटो कंप्लीट की सुविधा है। और भी बढ़िया होगा, यदि कोई भी अक्षर लिखने पर उस से संबन्धित केवल ईमेल पते ही नहीं, पर ईमेल के भीतर के अन्य शब्द या वाक्यांश भी दिखें। कितना आलसी बनाएँगे यह लोग हमें? Read the rest of this entry »

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